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इन क्रूर, बर्बर, अमानवीय, तरीकों से दी जाती थी प्राचीन काल में मौत

Posted on April 30, 2017August 15, 2020 by Pankaj Goyal

The world’s most horrific death penalties throughout history : अगर आप कमजोर दिल वाले हैं, तो इसे न पढ़ें। जहां मौत का नाम सुनते ही डर लगने लगता है, वहां मौत देने के क्रूरतम तरीकों के बारे में जानकर दिल दहल जाएगा। इंसानी इतिहास में अपराधियों और दुश्मनों को मौत देने के लिए ऐसे तरीके इस्तेमाल किए जाते थे, जिनमें आदमी तिल-तिल करके करोड़ों बार मरता था। इनसे ज्यादा क्रूर, बर्बर, अमानवीय, हिंसक और असहनीय तरीके नहीं हो सकते…

नाव में नरक का अहसास

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प्राचीन फारस में ऐसी सजा दी जाती थी। इसमें अपराधी को एक नाव में बांध दिया जाता था। उसे जबरदस्ती ढेर सारा दूध और शहद पिलाया जाता, ताकि उसे दस्त शुरू हो जाएं। फिर उसके शरीर पर भी दूध-शहद डाल दिया जाता। नाव जंगल के बीच एक तालाब मे रहती थी। दूध और शहद कई तरह की चींटियों, कीड़े-मकोड़ों को आकर्षित करता था। इंसान के दस्त से भी ऐसे जीव वहां बड़ी तादाद में जुट जाते। करोड़ों की संख्या में ये कीड़े-मकोड़े उस इंसान को काटने लगते। धीरे-धीरे उसका शरीर सड़ने-गलने लगता। वह भूख-प्यास से बेहाल हो जाता। इस तरह अंतत: तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो जाती।

चीन में लिंग ची में होती थी ऐसी क्रूरता


आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चीन में 1905 तक लिंग ची कहलाने वाले क्रूर तरीके से मौत की सजा दी जाती थी। इसके बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लिंग ची के तहत सबसे दुष्ट प्रकार के क्रिमिनल्स को चौराहे पर बांधकर तेज धार वाले चाकू से जगह-जगह काटा जाता था। पहले उसकी छाती और जांघों का मांस काटा जाता। फिर नाक, कान, उंगलियां, लिंग आदि काटे जाते। इस प्रक्रिया में सैकड़ों बार चाकू चलाया जाता। मांस के लोथड़े निकाले जाते। इतना सब होने के बाद भी अपराधी मरता नहीं था, तड़पता रहता, तो चाकू से उसका दिल निकाल लिया जाता। अगर शासक को किसी अपराधी पर थोड़ी-बहुत दया आ जाती, तो लिंग ची से पहले उसे अफीम पिला दी जाती थी, ताकि उसे दर्द का अहसास कम हो।

तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा देना


यह सजा 19वीं सदी तक प्रचलित थी। अंग्रेजों ने कई हिंदुस्तानियों को इस तरह तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया। इस सजा में व्यक्ति के तत्काल चीथड़े उड़ जाते थे और वह तड़पता नहीं था। हमारे कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हंसते-हंसते तोप के मुंह पर बंधे थे।

भट्ठी पर तड़पा-तड़पा कर मारना


यह आग में जलाने से भी ज्यादा क्रूर है, क्योंकि इसमें धीरे-धीरे तड़पकर मौत होती थी। इसमें भट्ठी जैसी संरचना पर व्यक्ति को लिटाकर नीचे से कोयले जलाए जाते थे। जब कोयलों की आंच बढ़कर इंसान के शरीर तक पहुंचती, तो वह धीरे-धीरे गर्म होकर जलता था।

घोड़ों से बांधकर खिंचवाना


यह सजा रोमन साम्राज्य में दी जाती थी। इसमें अपराधी या दुश्मन के हाथ-पैरों को चारों दिशाओं में चार घोड़ों से बांध दिया जाता था। इसके बाद घोड़े विपरीत दिशाओं में ताकत लगाकर चलने लगते। इससे व्यक्ति के हाथ-पैर शरीर से अलग हो जाते और बेहद दर्द तथा शॉक से उसकी मौत हो जाती। इसके बाद घोड़ों के पीछे बंधे हाथ-पैर शहर में घुमाए जाते, ताकि बाकी लोग डरें।

बढ़ते बांसों पर बांधकर मारना


यह सजा एशिया में प्रचलित थी। बांस जब बढ़ते हैं, तो उनके सिरे नुकीले होते हैं। इन पर लिटाकर अपराधी को बांध दिया जाता था। बांस धीरे-धीरे व्यक्ति के शरीर को छेदते हुए बढ़ते। यही नहीं, वह जल्दी मरे नहीं, इसके लिए उसे खाना-पानी भी दिया जाता था। इसमें मौत बहुत लंबे समय में होती थी।

खौलते कड़ाहे में बिठाकर मारना


यह सजा कई देशों में प्रचलित थी। इसके लिए कड़ाहे में पानी या तेल भरा जाता और व्यक्ति को बिठाकर नीचे से आग लगा दी जाती। तेल या पानी धीरे-धीरे गर्म होता और व्यक्ति की तड़प बढ़ती जाती। इसका प्रयोग मारने के साथ-साथ टॉर्चर करने और राज़ उगलवाने के लिए भी होता था।

सांड़ के भीतर ठूंसकर भूंजना


यह सजा एथेंस में दी जाती थी। इसके तहत आदमी को एक मैटल के बने खोखले सांड़ के भीतर ठूंसकर ढक्कन बंद कर दिया जाता था। उसके बाद नीचे आग जला दी जाती थी। आग में मैटल धीरे-धीरे तपकर लाल हो जाता और अंदर बंद आदमी तड़प-तड़प कर मरता। सांड़ का मुंह खुला रहता था, जिससे होकर उसकी चीखें बाहर तक आती रहतीं।

इंसान को आरी से चिरवाना


यह सजा मध्यकाल में प्रचलित थी। इसमें व्यक्ति को सीधा खड़े करके या उल्टा लटकाकर, दोनों तरह से आरी से चीरा जाता था। उल्टा लटकाने वाला तरीका ज्यादा दर्दनाक होता था, क्योंकि तब शरीर लिंग से लेकर पेट तक चिर जाता, लेकिन दिमाग एक्टिव रहता था, इसलिए व्यक्ति को भयंकर दर्द का अहसास होता। चीन में इंसान को बीच से काट दिया जाता था, जिससे उसकी मौत तुरंत हो जाती।

भूखे शेरों के सामने डाल देना


प्राचीन रोम में एम्फीथिएटर और कोलोशियम बनाए गए थे। वहां मनोरंजन की एक्टिविटीज होती थीं। इसके लिए अपराधियों को तरह-तरह से मारा जाता था। उन्हें भूखे शेरों के सामने डाल दिया जाता था। ऊपर से बहुत सारे लोग देखते और तालियां बजाते। नीचे शेर उस अपराधी को नोंच डालते।

हाथी के पैरों तले रौंदवाना


हम भारतीय इस सजा से परिचित हैं। प्राचीन काल में हाथी के पैरों तले कुचलवाकर मार डाला जाता था। यह बड़ी भयंकर मौत होती थी। इसका प्रचलन साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया में था।

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