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Lanka Minar History Story in Hindi

लंका मीनार – भाई-बहिन एक साथ नहीं जा सकते इस मीनार के ऊपर

Posted on December 28, 2017 by Pankaj Goyal

Lanka Minar History In Hindi | Lanka Minar Story | यूपी के जालौन में 210 फीट ऊंची ‘लंका मीनार’ है। इसके अंदर रावण के पूरे परिवार का चित्रण किया गया है। खास बात ये है कि इस मीनार के ऊपर सगे भाई-बहन एक साथ नहीं जा सकते हैं। आइए जानते है क्या है इसके पिछे की कहानी –

यह भी पढ़े – शंगचुल महादेव मंदिर – घर से भागे प्रेमियों को मिलता है यहां आश्रय

Lanka Minar History Story in Hindi

इस मीनार का निर्माण मथुरा प्रसाद ने कराया था जो की रामलीला में रावण के किरदार को दशकों तक निभाते रहे। रावण का पात्र उनके मन में इस कदर बस गया कि उन्होंने रावण की याद में लंका का निर्माण करा डाला।

1875 में मथुरा प्रसाद निगम ने रावण की स्मृति में यहां 210 फीट ऊंची मीनार का निर्माण कराया था, जिसे उन्होंने लंका का नाम दिया। सीप, उड़द की दाल, शंख और कौड़ियों से बनी इस मीनार को बनाने में करीब 20 साल लगे।

उस वक्त इसकी निर्माण लागत 1 लाख 75 हजार रुपए आंकी गई थी। स्वर्गीय मथुरा प्रसाद न केवल रामलीला का आयोजन कराते थे, बल्कि इसमें रावण का किरदार भी वो स्वंय निभाते थे। मंदोदरी की भूमिका घसीटीबाई नामक एक मुस्लिम महिला निभाती थी।

Lanka Minar History Story in Hindi

इसमें सौ फीट के कुंभकर्ण और 65 फीट ऊंचे मेघनाथ की प्रतिमाएं लगी हैं। वहीं मीनार के सामने भगवान चित्रगुप्त और भगवान शंकर की मूर्ति है।

मंदिर का निर्माण इस तरह कराया गया है कि रावण अपनी लंका से भगवान शिव के 24 घंटे दर्शन कर सकता है। परिसर में 180 फीट लंबे नाग देवता और 95 फीट लंबी नागिन गेट पर बैठी है। जो कि मीनार की रखवाली करते हैं।

नाग पंचमी पर इस कंपाउंड में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है और दंगल भी लगता है। कुतुबमीनार के बाद यही मीनार भारत की सबसे ऊंची मीनारों में शामिल है।

भाई-बहन का एक साथ जाना है निषेध
इस मीनार की एक ऐसी भी मान्यता है जिसके अंतर्गत यहां भाई-बहन एक साथ नहीं जा सकते। इसका कारण ये है कि लंका मीनार की नीचे से ऊपर तक की चढ़ाई में सात परिक्रमाएं करनी होती हैं, जो भाई-बहन नहीं कर सकते। ये फेरे केवल पति-पत्नी द्वारा मान्य माने गए हैं। इसीलिए भाई-बहन का एक साथ यहां जाना निषेध है।

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