<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	
	>
<channel>
	<title>
	Comments on: Shrimad Bhagavad Gita : ध्यान रखें गीता में बताई गई ये बातें, वरना बढ़ता है वजन	</title>
	<atom:link href="<br />
<b>Notice</b>:  Undefined index: host in <b>/home/ajabgjab/public_html/wp-includes/feed.php</b> on line <b>662</b><br />
https:///2015/10/shrimad-bhagwat-geeta-its-tips-for.html/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>/2015/10/shrimad-bhagwat-geeta-its-tips-for.html</link>
	<description>Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion,  Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts</description>
	<lastBuildDate>Thu, 22 Dec 2016 16:04:06 +0000</lastBuildDate>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	
	<item>
		<title>
		By: Ashok		</title>
		<link>/2015/10/shrimad-bhagwat-geeta-its-tips-for.html#comment-3693</link>

		<dc:creator><![CDATA[Ashok]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Dec 2016 16:04:06 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.ajabgjab.com/2015/10/16/shrimad-bhagwat-geeta-its-tips-for/#comment-3693</guid>

					<description><![CDATA[+Neeti sharma *जी धन्यवाद <img src="https://s.w.org/images/core/emoji/13.0.1/72x72/1f64f.png" alt="🙏" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> आप तत्वज्ञान आधार स्वयं*
&quot;*गु* &quot; का अर्थ हैं -- *गुणातीत* 
&quot;*रू* &quot; का अर्थ हैं -- *रूपातीत*
&quot;*गुकारं*&quot; *प्राकृतगुणातीतं* 
&quot;*रूकारं*&quot; *अशुद्धमायारूपातीतम्*
*मंजिल मिले या तजुर्बा, चीजें दोनों ही नायाब है !!* 
अहम् ब्रह्मास्मि...*ब्राह्मण ...I am DIVINE BRAIN...
 
*मेरी अपनी अभी कोई पहचान नहीं है क्योंकि मैं आत्म-केन्द्रित,एकांत-प्रिय और प्रतिस्पर्धाओं से दूर रहना पसंद करता रहा हूँ.*

*शरण में उसकी जाना होगा*

*जो हम बोते हैं, वही हम काटते हैं. हमारे द्वारा हर पल कर्मों के बीज बोये जा रहे हैं. अहंकार से ग्रसित होकर जो कर्म हम करते हैं, उसमें तो खर-पतवार ही उगता है, उसमें कोई फल-फूल नहीं लगते. हमें अपने मन की भूमि पर ध्यान और साधना के बीज बोने हैं तब जो फसल मिलेगी वह शांति, प्रेम व आनंद के फूल खिलाएगी. ऐसी खेती के लिए संकल्प व श्रद्धा का होना आवश्यक है. कोई भी विकार मन में दुःख के कांटे उगाने के लिए सक्षम है, एक बार यदि संकल्प कर लिया कि इसके बस में नहीं होना है तो उससे मुक्त हुआ जा सकता है. जैसे सख्त जमीन को हल के द्वारा नर्म किया जाता है, शरणागति रूपी हल से मन की धरती को तैयार करना होगा. सद्गुरु के चरणों में झुका हुआ शिष्य ही अपने भीतर निरहंकार हो सकता है.*]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>+Neeti sharma *जी धन्यवाद 🙏 आप तत्वज्ञान आधार स्वयं*<br />
&#8220;*गु* &#8221; का अर्थ हैं &#8212; *गुणातीत*<br />
&#8220;*रू* &#8221; का अर्थ हैं &#8212; *रूपातीत*<br />
&#8220;*गुकारं*&#8221; *प्राकृतगुणातीतं*<br />
&#8220;*रूकारं*&#8221; *अशुद्धमायारूपातीतम्*<br />
*मंजिल मिले या तजुर्बा, चीजें दोनों ही नायाब है !!* <br />
अहम् ब्रह्मास्मि&#8230;*ब्राह्मण &#8230;I am DIVINE BRAIN&#8230;<br />
 <br />
*मेरी अपनी अभी कोई पहचान नहीं है क्योंकि मैं आत्म-केन्द्रित,एकांत-प्रिय और प्रतिस्पर्धाओं से दूर रहना पसंद करता रहा हूँ.*</p>
<p>*शरण में उसकी जाना होगा*</p>
<p>*जो हम बोते हैं, वही हम काटते हैं. हमारे द्वारा हर पल कर्मों के बीज बोये जा रहे हैं. अहंकार से ग्रसित होकर जो कर्म हम करते हैं, उसमें तो खर-पतवार ही उगता है, उसमें कोई फल-फूल नहीं लगते. हमें अपने मन की भूमि पर ध्यान और साधना के बीज बोने हैं तब जो फसल मिलेगी वह शांति, प्रेम व आनंद के फूल खिलाएगी. ऐसी खेती के लिए संकल्प व श्रद्धा का होना आवश्यक है. कोई भी विकार मन में दुःख के कांटे उगाने के लिए सक्षम है, एक बार यदि संकल्प कर लिया कि इसके बस में नहीं होना है तो उससे मुक्त हुआ जा सकता है. जैसे सख्त जमीन को हल के द्वारा नर्म किया जाता है, शरणागति रूपी हल से मन की धरती को तैयार करना होगा. सद्गुरु के चरणों में झुका हुआ शिष्य ही अपने भीतर निरहंकार हो सकता है.*</p>
]]></content:encoded>
		
			</item>
	</channel>
</rss>
